रामेश्वरम दक्षिण भारत में स्थित तमिलनाडू राज्य में है, रामेश्वरम जहा श्रीराम ने लंका जाने से पहले पूजा की थी, रामेश्वरम को वाराणसी जितना ही पवित्र मन जाता है यहाँ पर भी लोग अस्थिया विसर्जित करने आते हैं और रामेश्वरम चार धामों में से एक धाम है !

रामेश्वरम कैसे जायें 

दिल्ली से रामेश्वरम लगभग 2800 किमी दूर है, दिल्ली से रामेश्वरम जाने के लिए दो रास्ते है या तो आप मदुरै होकर जा सकते हैं या चेन्नई होकर या आप एक सीधी ट्रेन पकड़ कर सीधा रामेश्वरम पहुँच सकते हैं!

दिल्ली से केवल एक ही ट्रेन रामेश्वरम सीधी जाती है तो उसमे जगह मिलना लगभग नामुमकिन सा होता है, इसलिए मैंने अपना सफ़र चेन्नई के रास्ते पूरा किया और चेन्नई से एक दूसरी ट्रेन चेन्नई एग्मोर रेलवे स्टेशन से रामेश्वरम के लिए पकड़ी !

अगर आपके पास पैसा है तो आप फ्लाइट से भी चेन्नई या मदुरै तक जा सकते है !

मेरी पहली सोलो ट्रिप 

ये कहानी है मेरी पहली सोलो ट्रिप की, दिल्ली से निकला चेन्नई के लिए राजधानी एक्सप्रेस में और सोच रहा था की अकेले कैसे ये सब कर पाउँगा, चेन्नई पहुचने के बाद यकीं हुआ की हाँ मैं अकेला हूँ और यहाँ मेरी भाषा भी कोई अच्छे से नहीं जानता, पर अब निकल गए थे तो आगे बढ़ना ही था!

सफ़र का मंजिल से गहरा नाता है मंजिलो में तो मिल जाते हैं लोग पर सफ़र में साथ कम लोगो को निभाना आता है

अगले दिन चेन्नई एग्मोर रेलवे स्टेशन से मैंने रामेश्वरम के लिए ट्रेन पकड़ी ट्रेन स्लीपर थी और मुझे आदत थी उत्तर भारत की ट्रेनों में सफ़र करने की, जहा पर स्लीपर के डब्बे को जनरल का डब्बा समझ कर हर कोई चढ़ जाता है!

चेन्नई से रामेश्वरम तक कोई भी फालतू आदमी डब्बे के अंदर नहीं आया, ट्रेन में वही लोग थे जिन्होंने रिजर्वेशन करवाया हुआ था और ट्रेन के हर डब्बे में एक पुलिस का सैनिक दिखा जो की उत्तर भारत की ट्रेनों में नहीं दिखता, टिकेट वगेरा सब चेक हुई लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं किसी और देश से आया हूँ, उस ट्रेन में तमिल नाडू के लोग ही ज्यादा सफ़र करते थे!

उनके बीच मैं अकेला बिलकुल अलग था, मैंने कोशिश की लोगो से बात करने की पर उन्हें मेरी हिंदी समझ नहीं आई और मुझे उनकी तमिल और इंग्लिश में इंसान hi हेल्लो से ज्यादा क्या बात करेगा , वैसे भी रात हो चुकी थी और सोने का समय हो गया था, मैं अपनी सीट पर सो गया और जब आँख खुली तो सुबह होने को थी!

सुबह 5 बजे रामेश्वरम आने वाला था, रामेश्वरम पामबन टापू पर है जिसे एक पुल भारत की मुख्य भूमि से जोड़ता है, पामबन ब्रिज जिसके चर्चे मैंने सुने थे, पर सुबह सुबह का वक़्त था और अँधेरा हो रहा था तो उस पुल से गुज़रते हुए ट्रेन के बाहर कुछ खास नहीं देख पाया पर हवा के थपेड़ो से पता चल रहा था मैं समुन्दर के बीचो बीच हूँ और उसकी ताकत का एहसास मुझे हो रहा था, अब मैं रामेश्वरम पहुचने वाला था और अब मुझे एक कमरा ढूँढना था क्यूंकि मैं यहाँ 5 दिन रहने वाला था !

रामेश्वरम में होटल ढूँढना बच्चो का खेल नहीं

रामेश्वरम एक छोटा सा शहर है शहर कम गाँव जैसा ज्यादा हैं यहाँ पर मंदिर होने की वजह से होटल वगेरा मिल जाते हैं जो की रामेश्वरम मंदिर के आस पास ही हैं!

रामेश्वरम में न तो आपको कोई मॉल मिलेगा न कोई बड़ी दुकाने और यहाँ मैं अकेला पहुँच गया था अब तो बस खुद को खोजना था पर उससे पहले एक कमरा खोजना था जहाँ मैं अपने 5 दिन बिता सकूँ, रेलवे स्टेशन से बहार निकलते ही मैं सड़को पर घुमने लगा होटल की तलाश में, कई सारे होटल में जाने के बाद मुझे हर जगह से एक जवाब मिला की हम अकेले बन्दे को कमरा नहीं देते, मैं रामेश्वरम में अकेला था और कमरा कोई दे नही रहा था!

ख़तम हो रही हो आस और कोई रास्ता न हो पास, तो मदद का एक हाथ भी खास हो जाता है

अब बिना कमरे के मैं वहां पर अपने दिन कैसे बिताता तभी मैंने एक ऑटो वाले से बात की, उसको अपनी कहानी बताई और उसने फिर “Sumathi Lodge” में बात की और मुझे कमरा दिलवाया, इस देश में हर कोई एक दुसरे की मदद करने को तैयार रहता है बस मदद मांगने का काम तो आपको ही करना पड़ेगा !

अगर आप अकेले रामेश्वरम जा रहे हैं तो अपने रहने का बंदोबस्त पहले करलें, अगर आप ऑनलाइन होटल बुक कर रहे हैं तो कॉल करके पहले सुनिश्चित कर लें की वो आपको अकेले रुकने देंगे या नहीं !

रामेश्वरम से धनुषकोडी 

रामेश्वरम में कई सारे मंदिर है पर मैं तो घर से धनुषकोडी जाने के लिए निकला था रामेश्वरम तो बस एक पड़ाव था, धनुषकोडी रामेश्वरम से 20 किमी दूर है, धनुषकोडी में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं होती इसलिए वह सुबह जाकर शाम को वापस आना होता है, मैंने अपना सामान कमरे में रखा और मैं सुबह सुबह निकल गया धनुषकोडी के लिए, उस ऑटो वाले के ऑटो में जिसने मुझे कमरा दिलवाया था!

रामेश्वरम से धनुषकोडी तक का रास्ता 20 किमी का है और आपको सन्नाटे के साथ चलती समुंद्री हवा के एहसास के साथ यकीं हो जाता है की आप वहां दुनिया से कितना दूर हैं, कुछ देर में हम धनुषकोडी पहुँच जाते हैं!

Road to Sethu Point or Adam's bridge
Road to Sethu Point or Adam’s bridge

आगे रोड न होने के कारन आगे का रास्ता या तो पैदल तय किया जा सकता है या फिर बड़े टायर वाली जीप में क्युकि आगे सिर्फ रेत है और सड़क के दोनों तरफ समुन्द्र, सुबह के 8 बजे थे और धनुषकोडी में कोई नहीं था कुछ जीप वालो के अलावा, रामेश्वरम जाने वाले लोग कम ही धनुषकोडी जाते हैं कुछ मेरी तरह उत्साही ही धनुषकोडी जाते हैं!

जीप वाले से बात हो गयी जीप वाला मुझे भारत के आखिरी छोर तक लेजाने को राज़ी हो गया, जहाँ से श्रीलंका सिर्फ 35 किमी दूर है, जीप जिस रास्ते पर चल रही थी वहां न तो कोई सड़क थी न कोई पेड़, आपको यकीं नहीं होगा की आप तमिल नाडू में हैं या राजस्थान में!

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Dhanushkodi Ghost Town

जीप से मैं पहुंचा धनुषकोडी टाउन, धनुषकोडी टाउन में किसी ज़माने में लोग रहते थे, वहां भारतीय रेल की रेलगाड़ी तक जाती थी पर 1964 में आये एक चक्रवात ने धनुषकोडी को बर्बाद कर दिया और अब वहां सिर्फ पुराने धनुषकोडी के अवशेष बचे हैं, पुराना चर्च, रेलवे स्टेशन जो की सब खंडर हो चूका है उस जगह को अब घोस्ट टाउन भी कहा जाता है !

Ghost Town Church Dhanushkodi
Ghost Town Church Dhanushkodi

उस वीरान जगह से निकलते ही एहसास हुआ की कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती, आगे बस कुछ ही दुरी पर था सेतु पॉइंट जिससे राम सेतु या अंग्रेजी में adam’s bridge भी कहते हैं, यह वही स्थान है जहा पर कहा जाता है की श्रीराम ने यहाँ पर समुन्द्र में पानी का पुल बनवाया था और लंका गए थे!

Comparision of Both sides
Comparision of Both sides

मैं उसी जगह पर था एक छोटा सा रास्ता जहा दोनों तरफ समुन्द्र है एक तरफ समुन्द्र शांत है जैसे की कोई तालाब हो और दूसरी तरफ उफान मारती हुई लहरें जो की अपने साथ किसी को भी बहाकर ले जा सकती हैं वो एक दम अलग ही रूप था प्रकर्ति का और जिसको मैं घंटो तक देख सकता था!

Adam's Bridge Sethu Point
Adam’s Bridge Sethu Point

यह तस्वीर में मैंने पानी के काफी अंदर जाकर खीची थी, इस जगह कुछ लोग दिखे जो की रामेश्वरम के रहने वाले थे, भारत के आखिरी छोर पर खड़ा था जहा से श्रीलंका पास में ही था, और पानी इतना शांत था जैसे बारिश के बाद एक तालाब बन गया हो, मैं पानी में करीब आधा किलोमीटर तक अंदर चला गया और पानी मेरे घुटनों तक ही था, मैं और आगे भी जा सकता था क्युकि पानी बिलकुल भी गहरा नहीं था, पर तैरना तो आता नहीं कोई मुसीबत आती तो वापस आना मुश्किल हो जाता इसलिए मैं ज्यादा अंदर तक नहीं गया!

पानी इतना साफ़ था की शायद ही भारत में कही किसी जगह का समुन्द्र इतना साफ़ हो, इसकी एक वजह यह भी है की वो इलाका इतना दूर है बाकी भारत से की वहां जादा लोग जा नहीं पाते, उस सेतु पॉइंट तक सड़क भी नहीं है जिसकी वजह से वहां पहुँच पाना और भी मुश्किल है, पर सुना है अब वहां सड़क बन रही है जो की उस जगह की बर्बादी का कारण बन सकती है !

रात को वहां पर किसी को रुकने नहीं दिया जाता तो कुछ घंटे मैं वह बैठा फिर धनुषकोडी टाउन की तरफ आ गया, और वहां बैठ कर भी समुन्द्र की लहरों को देखता रहा शाम होने को थी मैंने सुबह से कुछ चिप्स और पानी के अलावा कुछ नहीं खाया था और वहां कुछ मिलता भी नहीं इसलिए अब होटल वापस आने का समय था, उस जगह इतनी शांति थी की मैं कई दिन वह बिता सकता था पूरा दिन वह गुजरने के बाद मुझे अंदर से सुकून महसूस हुआ क्युकि वहां जाकर मैं अपनी सारी परेशानिया, तकलीफे भूल चूका था !

मैं दुनिया भुला कर खुद को ढूँढने गया था और खुद को ही वह भुला आया !

अगली पोस्ट में पामबन bridge, अब्दुल कलम का घर और बाकी सब !